1. मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी नदियों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। नदियां को वर्णन करते हुए वो कहते हैं कि जिन नदियों के पुल कच्चे हों, टूटे हुए हैं उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। क्योंकि वक्त नदी के पानी का बहाव तेज़ हो जाए या उसकी दिशा बदल जाए इसके बारे में कोई कुछ नहीं कर सकता। इसलिए इन पर विश्वास करना भारी पड़ सकता है।
2. आगे चाणक्य कहते हैं जिन जीव-जंतु के खतरनाक नाख़ून हो या बड़े-बड़े सिंग हो उन पर भी अधिक भरोसा करना परेशानी से भरा हो सकता है। क्योंकि इनका कोई भरोसा नहीं होता कि ये कब बिगड़ जाए और अपने नाख़ून और सिंग से आप पर हमला कर दें।
3. इसके अलावा चाणक्य के अनुसार राज्य व कुल से संबंध रखने वाले व्यक्ति और शासन से संबंधित व्यक्ति पर भी अधिक विश्वास नहीं करना चाहिए। वो इसलिए क्योंकि ये अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए किसी का भी भरोसा तोड़ सकते हैं।
4. किसी शस्त्रधारी पर भी ऊपर भरोसा करना हानिकारक साबित हो सकता है। और जो लोग अपने पास हथियार आदि रखते हों उन पर भी ज्यादा विश्वास नहीं करें। क्योंकि आपकी किसी बात से गुस्सा होकर वो कभी भी आप पर हथियार से प्रहार कर सकते हैं।
5. आख़िर में चाणक्य कहते हैं वैसी स्त्री जिसका स्वभाव बहुत चंचल हो, उस पर भी विश्वास न करें।

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