प्रियंका गांधी ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ को भंग करना लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव को जिस तरह से ब्लैकलिस्ट किया गया है वो सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। बीजेपी सरकार खुद चुनकर आई है। लेकिन छात्रों की आवाज से वो डर रही है। छात्रों की आवाज दबाने की पूरजोर कोशिश की जा रही है। यह तानाशाही नहीं है तो और क्या है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ पर समाजवादी पार्टी समर्थित छात्रों का कब्जा था। जानकार बताते हैं कि पिछले एक साल में इस तरह की खबरें मिलती रहीं है कि छात्रसंघ के पदाधिकारी छात्रों के मुद्दों की जगह किसी खास पार्टी का एजेंडा बढ़ाने का काम कर रहे थे। इसकी वजह से विश्वविद्यालय में पढ़ाई लिखाई के माहौल पर बुरा असर पड़ रहा था। विश्विविद्यालय एक तरह से राजनीति का अखाड़ा बन चुका था। सरकार इस तरह की परिस्थतियों में हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकती थी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ को भंग करने के खिलाफ आवाज उठाने पर @nsui से छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव को प्रशासन ने निलंबित करके ब्लैक लिस्टेड कर दिया है।— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) 16 July 2019
भाजपा सरकार तो खुद चुनकर आयी है। मगर छात्रों के चुनाव और उनकी आवाज से इतना डरती क्यों है? यह तानाशाही नहीं तो क्या है?
योगी सरकार के इस फैसले की समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी भी विरोध कर रही है। इन दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि एक तरफ योगी सरकार कहती है कि छात्र, देश के भविष्य हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होना चाहिए।

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