इस गांव की ज्यादातर महिलाएं वेश्यावृत्ति कर अपना और अप ने परिवार का पेट पालती है। महिलाएं ही इस समाज का प्रमुख अंग होती है और उसी पर कमाई करने की जिम्मेदारी होती हैौ। महिलाएं अपने पति की मर्जी से दूसरे मर्दों को अपना जिस्म बेचकर घर चलाती है। शाम ढ़लते ही वो सज-संवर कर घर से बाहर निकल जाती है और पूरी रात अपने शरीर को बेचकर पैसे कमाती है। सुबह 6 बजे वो घर लौटकर वो बच्चों और पति के लिए खाना-पीना बनाने के साथ-साथ घर का कामकाज करती है। कुछ घंटे उसे आराम के लिए मिल जाते हैं और फिर सूरज ढ़लते ही वो अपने काम में जुट जाती है।
जिस दिन वो 5 ग्राहकों का टारगेट पूरा कर लेती है, उसे वो अपना सबसे अच्छा रात मानती है। पुलिस की नजरों को बचाकर उन्हें अपना ग्राहक ढ़ूढना होता है। जहां महिलाएं जिस्म का कारोबार करती है, वहीं मर्द घरों में बैठे रहते हैं। यहां लड़कियों की शादी कम उम्र में ही हो जाती है, क्योंकि उन्हें शादी के बाद इसी कारोबार में जुटना होता है। लड़कियों की शादी जल्दी इसलिए कर दी जाती है ताकि वो कमाऊ सदस्य बन सके। दिल्ली के बगल में बसे इस गांव में वेश्यावृत्ति खुलेआम होती है, लेकिन बावजूद इसके यहां की स्थिति अब तक नहीं बदली। उम्मीद है कि जल्द ही यहां भी उजाला होगा और महिलाओं को इस दलदल भरी जिंदगी से आजादी मिलेगी।
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