आत्मा की शान्ति
व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात उसका अंतिम संस्कार किया जाता है इसके पश्चात उसकी अस्थियों को गंगा जी में विसर्जित किया जाता है ऐसी मान्यता है की गंगा जी में अस्थियाँ विसर्जित करने से व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है।
गंगा जी में अस्थियाँ विसर्जित करना होता है शुभ
हिन्दू धर्म शास्त्रों और पुराणों में बताया गया है की व्यक्ति की अस्थियाँ यदि गंगा जी में विसर्जित की जाती है तो वह बहुत शुभ होता है।
पापों का नाश
गंगा जी को पाप नाशनी के नाम से भी जाना जाता है यदि व्यक्ति की अस्थियों का विसर्जन गंगा जी के मुख्य स्थान हरिद्वार, प्रयाग, गया आदि जगहो पर किया जाता है तो उस व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते है किन्तु अस्थि विसर्जन की क्रिया पूरे विधि विधान से की जाना चाहए।
वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार गंगा नदी से कई मीलों की भूमि की सिचाई की जाती है और इन भूमियों को उपजाऊ बनाया जाता है जिससे नदी की उपजाऊ क्षमता धीरे धीरे समाप्त होने लगती है किन्तु इसमें अस्थियों के विसर्जन से फास्फोरस युक्त खाद की सदा बनी रहती है।
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