धधकती आग और खौलते अंगारों पर चले लोग, फिर भी न पैर जले और न कपड़े जानें कैसे हुए ये कारनामा


आग को कई तरीकों से हमारे आम जीवन में इस्तेमाल में लाया जाता है, जिसमें खाना बनाने से लेकर हाथ-पांव सेकने तक शामिल है। लेकिन इसी आग का अगर गलत इस्तेमाल किया जाए तो ये हमारे लिए नुकसानदायक भी है। सोचिए, अगर हल्की सी गर्म चीज या आग हाथ में लगे जाए तो कितना दर्द होता है। लेकिन एक जगह ऐसी भी है जहां लोग अंगारों के ऊपर से बड़े ही आराम से चले जाते हैं और उन्हें किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचता। आपको ये सोचकर भी डर लग रहा होगा, लेकिन ऐसा हुआ है।


इन दिनों कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जो कि मध्यप्रदेश के झबुआ की हैं। यहां धुलेंडी के तेजाजी मंदिर के पास शिव मंदिर प्रांगण में चूल परंपरा निभाई गई। इस परंपरा में लोग खौलते हुए अंगारों के ऊपर से गुजरते हैं।


इन खौलते अंगारों के ऊपर से गुजरने वाले लोगों के चेहरे पर किसी तरह का कोई डर नहीं होता। बल्कि, सभी लोग इस परंपरा को पूरी आस्था के साथ निभाते हैं। खौलते अंगारों को तैयार करने के लिए लगभग 121 किलो लकड़ी जलाई जाती है। इन जलती लकड़ियों में लगभग 21 किलों शुद्ध घी डाला जाता है और इसके बाद लोग इसके ऊपर से गुजरते हैं।


इन खौलते अंगारों के ऊपर से 40 से ज्यादा मन्नतधारी लोग चले, जिनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल थे। वहीं इन अंगारों के ऊपर से गुजरने से पहले कुछ लोगों ने अपने पैरों में मेहंदी लगा ली थी तो कुछ लोगों ने कुछ भी नहीं लगाया।


मेडिकल कारण के मुताबिक ये सब बहुत जल्दी होता है। शरीर की त्वचा का रेसिस्टेंस आग को लेकर जितना होता है, उससे कम समय में लोग अंगारों से निकल जाते हैं। वहीं अगर शरीर की त्वचा पर कोई लेप लगा हुआ हो तो गर्मी और कम असर करती है।

Post a Comment

और नया पुराने