दिवाली से पहले क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी, वजह हैं खास


आजकल दिवाली के लिए सभी घरों की साफ-सफाई में लगे हुए हैं। ऐसे में दिवाली के पहले धनतेरस और धनतेरस के बाद मनाए जाने वाले नरक चतुर्दशी के पर्व का अपना ही एक ख़ास महत्व हैं। ऐसे में नरक चतुर्दशी व नरक चौदस भी कहते हैं। शास्त्रो के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दुर्दांत असुर नरकासुर का वध किया था। 

क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी:

इस दिन के व्रत और पूजा के संदर्भ में एक दूसरी कथा यह भी है कि रति देव नामक एक धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हो गए थे और यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो, आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नरक जाना होगा। 

क्या था अपराध:

उसके बाद उन्होंने कहा आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है और फिर यह सुनकर यमदूत ने कहा कि राजन एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था, यह उसी पाप कर्म का फल है।

ऐसे में राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें अपनी सारी कहानी सुनाकर उनसे इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा और तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्राह्मणों को भोजन करवा कर उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। 

Post a Comment

और नया पुराने