प्यार बहुत ही प्यारा शब्द है चाहे खुद से हो या किसी और से बता दे कि, जबतक खुद से मोहब्बत नहीं करेंगे तब तक हम दूसरों से भी प्यार नहीं कर सकते। और फिर यही वजह रहती है कि रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है। तो सबसे पहले खुद से प्यार करना सीखें। हम अपनी ज़रूरतों को पहचाने और उसके लिए कोशिश करें। जब आप कोई लक्ष्य हासिल न कर पाएं तो ज़रूरी नहीं कि खुद को कोसें और निराश हो जाएं, हमेशा खुद को दोष देना अच्छा नहीं होता।
खुद से करें प्यार का इजहार:
# उन चीज़ों का चुनाव करें जिनसे आपको खुशी मिले बजाए कि वे चीज़ें करने के जो आप समझतें हो कि यह करना चाहिए। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट लिंडा ब्लेयर बताती हैं कि हमें ख़ुद से दोस्ती करनी चाहिए।
# मान लीजिए किसी दिन आपका ऑफिस में बुरा दिन गुज़रा। आप ख़ुद से नफ़रत करने लगे, आपको लगने लगा कि आप किसी काम में बेहतर नही, उस वक्त ऐसा सोचिए कि अगर आपका कोई दोस्त इन्हीं हालात में आपके सामने आता तो आप उसका हौसला बढ़ाने के लिए क्या कहते है। बस उसी तरह खुद का हौसला बढ़ाइए।
# जब हमें असुरक्षा की भावना घेरने लगती है तो हम अपनी कमियों पर नज़र डालने लगते हैं, हम अपने मन-मस्तिष्क में अपनी नेगेटिव छवि गढ़ने लगते हैं, हम उन लोगों से ख़ुद को तौलने लगते हैं जो हमारी नज़र में बेहद कामयाब हैं, ये तमाम बातें हमें और ज़्यादा निराश करने लगती हैं।



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