वेश्याएं का दर्द बंया करती हैं रैड लाइट एरिया की ये तस्वीरें!


अजीब है, दुनिया  हमारे समाज की नज़र , यहां परिस्थिति के साथ सोच बदलती है, और इंसान के साथ नज़रिया वेश्याओं के लिए हमारे समाज की न सोच अच्छी है, न नज़रिया।



वेश्यावृत्ति में लड़कियां अपनी इच्छा से कम और मानव तस्करी का शिकार बन कर ज़्यादा आती हैं, किसी के लिए ये मजबूरी का कदम है।



तो किसी के लिए ज़रूरत कोलकाता के पश्चिमी हिस्से में स्थित सोनागाछी में लगभग 14,000 लड़कियां और महिलाएं इस व्यवसाय में हैं। इनमें काफी संख्या में नाबालिग लड़कियां शामिल है।



एक अंग्रज़ी वेबसाइट से इंटरव्यू के दौरन इनमें से कई लड़कियों ने अपने जीवन की कई बातें शेयर की, सेक्स वर्कर बिशाखा ने बताया कि पहले वो घरेलू नौकरानी के तौर पर काम कर रही थी, पैसे कम मिलने के चक्कर में वो इस व्यवसाय में आई।



30 साल की वीणा ने बताया की शादि के लगभग 7 साल बाद तक उसका पति उसे शराब पीकर मारता था, उससे परेशान होकर उसने घर छोड़ा, अपनी बेटी के अच्छे भविष्य के लिए वो इस बिज़नेस में आई है। वीणा को अपने ही किसी ग्राहक से प्यार भी हो गया है।



दास नाम ​की एक महिला ने बताया ​कि वो अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने के लिए इस बिज़नेस में आई थी, अब उनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है।




अब वो नौकरी भी कर रहे हैं, दास का कहना है कि समाज को उनकी निन्दा करने से पहले खुद सोचना चाहिए।


 अगर वो घर पर बैठती तो क्या उसके बच्चे पढ़ पाते जब उसे ज़रूरत थी, तब किसी ने नौकरी नहीं दी थी।

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