- जानवर के चमड़े के बीच चांदी के टुकड़े को रखकर भारी हथौड़े से कूट-कूटकर ऐसा चांदी का वर्क बनाया जाता है। यदि वास्तव में इस प्रयोजन में चांदी के टुकड़े का उपयोग किया हो तो भी इस प्रक्रिया में प्रयुक्त जानवर के चमड़े एवं बनाने का स्थान पूरी तरह गंदा व बीमारी फैलाने वाला होता है।
- भारत के कुछ शहरों में यह बनाया जाता है। जहां घरों के सीलन व गंदगी भरे माहौल में चमड़े की परतों के बीच चांदी के टुकड़ों को रखकर बड़े हथौड़े से कूटकर बनाया जाता है।
- चांदी के वर्क का उपयोग करने से यह धीरे-धीरे जहर बनकर शरीर में घर कर जाता है जो कभी भी बड़ी मुसीबत बन सकता है। इससे कैंसर तक हो सकता है। यह वर्क सभी दृष्टि से शरीर को नुकसान पहुंचाता है, अतएव यह चांदी का कथित वर्क नहीं खाइए अन्यथा आपका बेड़ा गर्क हो सकता है।
- आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा में दवाओं में चांदी के उपयोग का उल्लेख आता है। यह कई विधियों के द्वारा इनकी दवाओं में मिलाया जाता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान चांदी व चांदी के वर्क से लाभ को नहीं स्वीकारता है।
- चांदी के वर्क में अगर सचमुच में चांदी है तो भी चमड़े व गंदगी के बीच उसके निर्माण से अनेक बीमारियों का खतरा रहता है। चांदी के स्थान पर आजकल निकल व अल्यूमीनियम आदि को ऐसी प्राचीन विधि से अथवा आधुनिक मशीनों से वर्क बनाया जाता है एवं चांदी का वर्क बताकर भारत में बेचा जाता है।
- बाजार में जो भी चांदी के वर्क के नाम पर बेचा व मिठाई, मेवों एवं पान के साथ खिलाया जा रहा है वह किसी भी दृष्टि से सुरक्षित व लाभदायी नहीं है। यह हर दृष्टि से स्वास्थ्यघाती है। खाने वाले मिठाई, मेवों व पान के साथ चांदी खा रहे इस फेर में न पड़ें।
- चांदी के वर्क के प्रचलन बढ़ने से इस धंधे में नक्कालों ने दखल किया और उसके स्थान पर उसके जैसे अन्य धातुओं का उपयोग होने लगा। वर्क में चांदी मिलावटी या नकली होने की स्थिति में हर दृष्टि से उपयोगकर्ता को नुकसान होता है।




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