यहां जलती चिताओं के बीच चिता-भस्म से होली खेलते हैं श्रद्धालु


उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में कल महाश्मशान घाट पर जलती चिताओं के बीच बाबा भोले नाथ ने भक्तों के संग चिता-भस्म एवं गुलाल से होली खेली। पौराणिक मान्यता है कि बाबा भोले रंगभरी एकदाशी पर मां पार्वती को गौना करार कर लाते तथा अगले दिन मणिकर्णिका घाट पर अपने भक्तों के साथ होली खेलने के लिए आते हैं।


इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए बड़ी शिवभक्त हर साल यहां जमा होते हैं तथा विधिविधान से पूजा-अर्चना के बाद ताजा चिताओं के भस्म एक दूसरे के शरीर पर लगाते हैं। श्रद्धालु हर-हर महादेव के जयकारे के बीच एक-दूसरे पर चिता-भस्म की वर्षा करते हैं।


पिछले कई वर्षों से इस धार्मिक आयोजन पिछले कई वर्षों से प्रयास कर रहे गुलशन कपूर ने बताया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हर वर्ष इजाफा हो रहा है। उन्होंने बताया कि रंगभरी के दूसरे दिन बाबा अपने अन्य भक्तों विशेषकर भूत एवं प्रेत के साथ होली खेलने के लिए आने की मान्यता है।


गंगा तट पर हर-रह महादेव एवं शिव-पार्वती अराधा से संबंधित भक्ति गीतों के बीच भक्त एक दूसरे को भस्म लगाकर होली के जश्न में घंटों डूबे रहे। इस पौराणिक धार्मिक आयोजन को देखने के लिए देश-विदेश के अनेक शिव भक्त मौजूद थे। 

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