स्वभाव न मिलना
आपस में विचारों और स्वाभाव का न मिलना रिश्तों के टूटने का कारण बनता है। संभव है कि आपका पार्टनर और आप अलग-अलग परिवेश से आते हों। ऐसे में आप दोनों में बहुत सी चीजें नहीं मिल पाती हैं। खासतौर पर आप दोनों के विचार जीवनशैली बिल्कुल मेल नहीं खा पाते हैं। ऐसे मामलों में किसी एक इंसान का ज्यादा समझदार और नरमदिल होना जरूरी है क्योंकि आदतें और विचारों में बदलाव संभव है मगर ये थोड़ा समय लेता है।
ज्यादा उम्मीदें
रिश्तों में जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रिश्तों में दरार का सबसे बड़ा कारण हैं। अपने पार्टनर की हर मजबूरी और विवशता को समझकर उस अनुसार व्यवहार करने से ही रिश्ता अच्छी तरह चल सकता है। कई बार आप पार्टनर से ज्यादा पैसे, ज्यादा समय, मंहगी चीजों आदि की मांग कर लेते हैं जिन्हें वो आसानी से नहीं पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा संबंधों को लेकर भी कई बार लोग पार्टनर को मजबूर करते हैं, जो गलत है। जरूरत से ज्यादा उम्मीद करने से रिश्ते बिगड़ते ही हैं।
झगड़े और लड़ाईयां
छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़ा होना किसी भी रिश्ते के लिए अच्छा नहीं होता है। खासतौर पर लाइफ पार्टनर्स के बीच, क्योंकि आपको एक पूरी जिंदगी साथ एक दूसरे का सहारा बनकर गुजारना है। अगर आप बात-बात पर झगड़ने लगते हैं, तो समझ लीजिये रिश्ते में कुछ गलत जरूर होने वाला है। झगड़े की वजहें कई हो सकती हैं। शांत दिमाग से उन झगड़ों के बारे में सोचें और अगर आप रिश्ता बचाना चाहते हैं तो झुकें भी। अपने पार्टनर से झगड़े की बजाय असहमति वाले मुद्दों पर बात करें, इससे कोई न कोई रास्ता निकलेगा।
शारीरिक हिंसा
अगर नोक-झोंक धीरे-धीरे शारीरिक हिंसा तक पहुंच जाए, तो समझिये कि रिश्ते बिगड़ने की शुरुआत हो गई है। अगर पार्टनर आपके साथ दुर्व्यवहार या मारपीट करता है तो उसका विरोध कीजिए और कोशिश कीजिए कि रिश्ता ठीक रहे। अगर आपको महसूस होता है कि पार्टनर ज्यादा हिंसक और गुस्से वाले हो गए हैं तो रिश्ता तोड़ देना ही ज्यादा बेहतर है।

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