यहां पारिवारिक परंपरा है लड़कियों का जिस्‍म का धंधा करना


मुगलकालीन इतिहास का वेश्यालय स्थित है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के 'चतुर्भुज स्थान' नामक जगह पर पुराने समय में यहां पर ढोलक, घुंघरुओं और हारमोनियम की आवाज ही पहचान हुआ करती थी। यह जगह भारत-नेपाल सीमा के करीब है और यहां की आबादी लगभग 10 हजार है।


हालांकि पहले यह कला, संगीत और नृत्य का केंद्र हुआ करता था लेकिन अब यहां जिस्म का बाजार लगता है। सबसे खास बात यह है कि वेश्यावृत्ति यहां पर पारिवारिक व पारंपरिक पेशा मानी जाती है। मां के बाद उसकी बेटी को यहां अपने जिस्म का धंधा करना पड़ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार के 38 जिलों में 50 रेड लाइट इलाके हैं जहां दो लाख से अधिक आबादी रहती है। ऐसे में यहां पर वेश्‍यावृत्‍ति का धंधा काफी बड़े पैमाने पर अपने पैर पसारे हुए है।


एक समय में इस जगह की पहचान यहां बजने वाले ढोलक,घुंघरुओं और हारमोनियम की आवाज से हुआ करती थी। लेकिन अब यहां जिस्‍म का बाजार लगता है। सबसे खास बात यह है कि वेश्‍यावृत्‍ति यहां पर पारिवारिक व पारंपरिक पेशा माना जाता है। मां के बाद उसकी बेटी को यहां अपने जिस्‍म का धंधा करना पड़ता है।

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