वजन भी होता है प्रभावित
फर्स्ट पीरियड्स यानी पहली बार मेन्स्ट्रुएशन जब शुरू हुआ उसे मेनार्के या रजोदर्शन भी कहते हैं। अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि अगर पीरियड्स समय से पहले शुरू हो जाता है तो युवावस्था के शुरूआती समय में वजन बढ़ने की संभावना रहती है और जीवन के बाद के सालों में मोटापा बढ़ने का खतरा रहता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि रजोदर्शन अगर जल्दी हो जाए तो इसका संबंध बचपन में हाइयर बॉडी मास इंडेक्स से होता है जिससे युवावस्था में मोटापा होने का खतरा रहता है।
दिल की सेहत पर पड़ेगा असर
अगर किसी लड़की का पीरियड्स 10 साल की उम्र से पहले या 17 साल की उम्र के बाद (दोनों चरमसीमा) शुरू हो तो ऐसी लड़कियां को दिल की बीमारी होने का रिस्क बहुत ज्यादा रहता है। अनुसंधानकर्ताओं ने 13 लाख महिलाओं पर की गई एक स्टडी में पाया कि जिन महिलाओं का मेन्स्ट्रुएशन साइकल 13 साल की उम्र में शुरू हुआ था उन्हें दिल की बीमारी होने का खतरा कम था जबकि जिन महिलाओं का पहला पीरियड 10 साल की उम्र से पहले या 17 साल की उम्र के बाद शुरू हुआ उनमें दिल की बीमारी, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां होने का खतरा बहुत अधिक था।
डायबीटीज होने का खतरा
अनुसंधानकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में यह भी पाया कि जिन महिलाओं का पीरियड्स औसत उम्र से पहले शुरू हुआ उन्हें टाइप-2 डायबीटीज होने का खतरा भी ज्यादा था। चूंकि जल्दी रजोदर्शन होने का संबंध अधिक BMI से है लिहाजा यह टाइप-2 डायबीटीज का बड़ा रिस्क फैक्टर है। प्युबर्टी की शुरुआत का मतलब है शरीर में हॉर्मोनल बदलाव जिससे इंसुलिन प्रतिरोधक भी बढ़ जाता है।
प्रेग्नेंसी पर पड़ता है असर
इस रिसर्च में भी इस बात का भी खुलासा हुआ कि जिन महिलाओं का पीरियड्स छोटी उम्र में ही शुरू हो गया था उनमें प्रेग्नेंसी के दौरान कॉम्प्लिकेशन्स होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसी परिस्थिति में प्रीक्लैम्पसिया का रिस्क रहता है और अगर इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो यह मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा
अगर किसी महिला का पहला पीरियड 12 साल की उम्र से पहले शुरू हो जाता है तो उस महिला में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

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