पीरियड पेन भी दो तरह का होता है। पहला प्राइमरी डिसमेनोरिया, दूसरा सेकंडरी डिसमेनोरिया। पहले तरह का दर्द माहवारी के चलते गर्भाशय में होने वाले कॉन्ट्रैक्शन की वजह से होता है। इस दौरान कुछ हॉरमोन्स निकलते हैं जो लेबर पेन के दौरान भी क्रैंप्स के लिए जिम्मेदार होते हैं।
सेकंडरी डिसमेनोरिया का दर्द किसी न किसी मेडिकल कंडिशन की वजह से होता है। यह कंडिशन फाइब्रॉइड हो सकती है। फाइब्रॉइड नॉन कैंसरस ट्यूमर हैं जो गर्भाशय की दीवार पर हो जाते हैं। इंडोमेट्रिऑसिस सहित पेल्विक इनफ्लेमेट्री डिजीज, ऐडिनोमाऑसिस और सर्विकल स्टेनोसिस भी दर्द की वजहें हैं।
अगर आपकी उम्र 20 साल से कम है या आपके पीरियड 11 साल या कम उम्र में शुरू हो गए थे तो आपको डिसमेनोरिया होने का खतरा ज्यादा है। अगर आपके बच्चे नहीं हैं या पीरियड के दौरान हैवी फ्लो होता है तो भी पीरियड्स के दौरान आपको दर्द ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा इमोशनल स्ट्रेस भी आपका दर्द बढ़ा सकता है लिहाजा स्ट्रेस से बचने की कोशिश करें।
पीरियड पेन से बचने के लिए आप दर्द निवारक दवाएं जैसे ऐस्पिरिन या पैरासिटामॉल ले सकते हैं या फिर घरेलू उपचार भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं। घरेलू उपचार के लिए आप हॉट बाथ लें या फिर पेट के निचले हिस्से में गर्म पानी की बोतल से सिंकाई करें।
ध्यान रखें कि पीरियड्स के दौरान आराम करें और नियमित रूप से एक्सर्साइज भी इसके इलाज में फायदेमंद हो सकती है। इसके अलावा माहवारी के दौरान ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।

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