इस प्रक्रिया में परीक्षण के नाम पर बेहद निर्मम और भेदभाव भरा व्यवहार किया जाता है। इसका उम्मीदवार की शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी असर पड़ता है। मानव अधिकार संस्था ने राष्ट्रपति जोके विडोडो से भी गुहार लगाई है कि पुलिस को आदेश देकर इस टू फिंगर टेस्ट को बंद करवाएं। वूमेन राइट्स एडवोकेसी की डायरेक्टर निशा वारिया ने कहा है कि इंडोनेशिया की सरकार लंबे समय से पुलिस द्वारा किए जा रहे इस टेस्ट के प्रति कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इससे महिला अधिकारों के संरक्षण को लेकर सरकार की कमजोरी झलकती है। ग्रुप ने इस तरह का परीक्षण महिलाओं के लिए अपमानजनक और अव्यवहारिक है।
इंडोनेशिया में अलग-अलग जगह नियुक्त 6 महिला अधिकारियों ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें भी इसी परीक्षण से गुज़रना पड़ा था। ऐसी ही एक महिला ने अपना अनुभव बताया था कि वह किस तरह 20 महिलाओं में से चुनकर आई थी। उसे डर था कि एक बार टेस्ट से गुज़रने के बाद वह वर्जिन नहीं रह पाएगी। उन्होंने टू फिंगर टेस्ट शुरू जिससे काफी दर्द हुआ। पेंकाबुरु की एक अन्य महिला ने बताया कि उसकी पहचान गुप्त रखी गई थी। हालांकि वह बुरा अनुभव था जिसे वह कभी याद नहीं रखना चाहेगी।



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