रिश्तो में आ रही दूरियों को ऐसे करे दूर


ग़लतफ़हमी किसी कांटे की तरह होती है और जब वह आपके रिश्ते में चुभन पैदा करने लगती है, तो कभी फूल लगनेवाला रिश्ता आपको खरोंचे देने लगता है। जो जोड़ा कभी एक-दूसरे पर जान छिड़कता था, एक-दूसरे की बांहों में जिसे सुकून मिलता था और जो साथी की ख़ुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता था, वो जब ग़लतफ़हमी का शिकार होने लगता है, तो रिश्ते की मधुरता व प्यार को नफ़रत में बदलते देर नहीं लगती।  फिर राहें अलग-अलग चुनने के सिवाय उनके पास कोई विकल्प ही नहीं बचता। ऐसे में आप अपने रिश्तो को ऐसे बचा सकते हो।

1. अपने पार्टनर से नाराज़ होकर बोलचाल बंद करने की बजाय उससे बात करें. लेकिन उस समय जब वह सुनने के मूड में हो व परेशान या दुखी न हो। यदि वह क्रोधित हो, तो बात न छेड़ें और उनके तनावमुक्त होने का इंतज़ार करें।

2.  दोष न दें. जो हुआ उसके लिए साथी को दोषी न ठहराएं। ऐसा करने से वह आपकी बात सुनेंगे ही नहीं जो हुआ, उससे कैसे निबटा जाए, इस पर बात करें। ग़लतफ़हमी को कुछ समय की नाराज़गी समझ नज़रअंदाज़ न करें. उसे तुरंत सुलझा लें।

3. अपने पार्टनर की बात को बहुत ध्यान व धैर्य से सुनें। बेशक आपको बुरा लग रहा हो, पर बात पूरी होने के बाद ही कुछ कहें या निर्णय लें। संवादहीनता रिश्तों को सबसे ज़्यादा खोखला करती है. जीवनसाथी के मन की बात जाने बिना आप उसे दोषी कैसे कह सकते हैं।

4. अगर ग़लती हुई है, तो ‘सॉरी’ कहने में हिचकें नहीं। इस तरह से आप यह बताते हैं कि अपनी ग़लतियों की ज़िम्मेदारी उठाने में आप पीछे नहीं रहते हैं। माफ़ करने की आदत डालें. पार्टनर ने आपको ग़लत समझा, कोई बात नहीं। उसे माफ़ कर दें, क्योंकि आप दोनों ने बहुत अच्छा समय एक-दूसरे के साथ बिताया है।

5. समझौतावादी बनें. शादी की सफलता व ख़ुशी दोनों की ही यह चाबी है। एक-दूसरे की भावनाओं व इच्छाओं का अगर सम्मान करते हैं, तो ग़लतफ़हमी होने का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन उसके लिए आपको ख़ुद की भावनाओं और इच्छाओं पर नियंत्रण रखना और समझौता भी करना होगा।


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