वाडिया नाम का यह गांव गांधीनगर से 250 किलोमीटर दूर बांसकांठा जिले में स्थित है। लोग इस गांव को तवायफों का गांव भी कहते हैं। इस गांव के बारे में कहा जाता है कि यहां जन्म लेने वाली हर लड़की को न चाहकर भी वेश्यावृत्ति की आग में जलना ही पड़ता है।
यहां आज भी वेश्यावृत्ति की आग में खुले आम जलती है महिलाएं
कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि यहां की लड़कियों को यह अभिशाप मिला है। यही कारण है कि यहां की कई लड़कियां मात्र 12 वर्ष की आयु में ही मां बन चुकी हैं। यहां की महिलाएं लोगों का बिस्तर गर्म करके पैसे कमाती हैं तो पुरुष उनके लिए ग्राहक ढूढ़कर लाने का काम करती हैं।
यहां लोग महंगी महंगी गाड़ियों से सिर्फ अपनी हवस की प्यास बुझाने ही आते हैं। बांसकांठा के पुलिसकर्मियों की दलील है कि वेश्यावृत्ति इस गांव के समाज में ही घर कर गई है। कोई सुधार के लिए आगे नहीं आना चाहता है।

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