पहला उपाय यह है कि एक पाटे पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर रखें। उसके बाद लाल गुलाब उन्हें अर्पित करें और धूप-दीपादि से उनका पूजन करें। इसके पश्चात लाल चंदन की माला से 108 बार इस मन्त्र का प्रतिदिन जप करें।
मन्त्र : पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीं।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।।
दूसरा उपाय यह है कि शुक्लपक्ष के मंगलवार से आरम्भ कर नौ दिनों तक रात्रि में सुन्दरकाण्ड का पाठ करना चाहिए। प्रथम दिन सुन्दरकाण्ड का एक पाठ, दूसरे दिन दो तथा इसी क्रम में बढ़ाते हुए नौवें दिन नौ पाठ करें। इसके लिए पहले एक पाटे पर लाल वस्त्र बिछाकर हनूमान् जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उन्हें गुड़-चने का भोग लगाएं तथा धूप-दीप से उनका पूजन कर सुन्दरकाण्ड के पाठ का संकल्प लें। प्रयोग के दौरान भूमिशयन, ब्रह्मचर्य एवं पवित्रता का विशेष रूप से ध्यान रखें। इससे जिस युवक की सगाई बार-बार टूट जाती है, उसे सुयोग्य पत्नी की प्राप्ति होती है।
तीसरा उपाय यह है कि पुरुष के विवाह का कारक शुक्र को माना गया है। शुक्र के अशुभ भाव में होने पर निम्न प्रयोग करें – 70 ग्राम सफेद चावल, 70 से.मी. सफेद कपड़ा, 7 मिश्री की डलियां, 7 सफेद पुष्प, 7 यज्ञोपवीत, 7 छोटी इलायची, 7 सफेद पुष्प, 7 सिक्के, 7 छहमुखी रुद्राक्ष तथा 7 सफेद चन्दन के टुकड़े। इन वस्तुओं को शुक्लपक्ष के शुक्रवार को एक सफेद कपड़े में बांधकर उसे अपने सामने रखकर श्रद्धाभाव से पूजा अर्चना करें तथा पूजा के बाद अपनी मनोकामना का मन में उच्चारण करें। फिर इस पोटली को अपने घर में किसी ऐसे कोने में रख दें जहां इस पर किसी की नज़र न पड़े। इस प्रयोग को पूर्णत: गुप्त रखें।

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