आपके घर में झगड़ों का कारण बनते हैं ये 7 वास्तु दोष...


वास्तु के जरिए अपनी सभी समस्याओं को दूर किया जा सकता हैं फिर चाहे वह निजी जीवन से जुड़ी हों या प्रोफेशन लाइफ से, यहां तक कि वास्तु के जरिए अपने रिश्तों को भी सुधार जा सकता है। यह कुछ ऐसे ही टिप्स हैं, जिन्हें अपनाकर सभी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है....

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1. घर का ईशान भाग (उत्तर-पूर्व) से उठा होना अशुभ माना जाता हैं। अगर यह उठा हुआ है तो पिता-पुत्र संबंधों में मधुरता व नजदीकी की कमी रहती है। इसलिए घर बनवाते समय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए।

2. घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्वी कोना खंडित होने से पिता-पुत्र में आपसी मामलों को लेकर हमेशा झगड़े होते हैं। इसलिए घर के उत्तर-पूर्वी कोने को हमेशा ठीक रखना चाहिए।

3. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्टोर रूम, टीले या पर्वत के समान आकृति के निर्माण से भी पिता-पुत्र के संबंधों में परेशानियां आती हैं और दोनों में अविश्वास बना रहता है। घर के उत्तर-पूर्वी कोने में स्टोर रूम आदि नहीं बनवाना चाहिए।

4. उत्तर-पूर्व दिशा में रसोई घर या शौचालय का होना भी घर के लोगों के संबंधों को प्रभावित करता है। साथ ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा में रसोई घर या शौचालय नहीं होना चाहिए।

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5. इलेक्ट्रॉनिक सामान, ज्वलनशील पदार्थ या गर्मी उत्पन्न करने वाले अन्य उपकरणों को ईशान (उत्तर-पूर्व) में रखने से पुत्र पिता की आज्ञा नहीं मानता है और घर-परिवार को अपमानित करता है। घर की उत्तर-पूर्वी दिशा में इन चीजों को नहीं रखना चाहिए।

6. यदि कोई प्लाट उत्तर व दक्षिण में संकरा तथा पूर्व व पश्चिम में लंबा है तो ऐसी जगह को सूर्यभेदी कहते हैं, ऐसी जगह पर पिता-पुत्र के संबंधों में अनबन की स्थिति सदैव रहती है। ऐसी जगह पर कभी घर नहीं बनाना चाहिए।

7. घर की उत्तर-पूर्व दिशा में कूड़ेदान बनाने या कूड़ा रखने से भी घर के लोगों में मन-मुटाव और जलन आदि भावना रखते हैं। इस दिशा में कूड़ादान भूलकर भी नहीं रखना चाहिए।

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