रिपोर्ट के मुताबिक इस मास्क में बायोमोलेक्यूल डिटेक्शन के लिए सिंथेटिक बायोलॉजी सेंसर का इस्तेमाल हुआ है। इसे पूरी तरह KN95 फेस मास्क के मानक पर तैयार किया गया है। यह मास्क व्यक्ति की सांस से महज 90 मिनट में ही यह पता लगा लेता है कि इसे पहनने वाला वायरस से संक्रमित है या नहीं।
खास बात यह है कि इस मास्क में दिया गया सेंसर हमेशा एक्टिव नहीं रहता है। अगर आप टैस्ट करना चाहते हैं तो इसे एक बटन की मदद से एक्टिव कर सकते हैं। इसमें लगी रीडआउट स्ट्रिप की मदद से आपको 90 मिनट के अंदर रिजल्ट मिल जाएगा। इसकी सटीकता को लेकर आरटी पीसीआर के परिणाम जितना दावा किया गया है।
वाइस इंस्टीट्यूट के एक शोध वैज्ञानिक और रिसर्च में शामिल पीटर गुयेन का कहना है कि एक पूरी लैब को एक छोटे मास्क में समेटने की कोशिश की गई है। इस मास्क में इस्तेमाल हुए सिंथेटिक बायोलॉजी सेंसर का आकार काफी छोटा है। कोरोना के अलावा यह सेंसर किसी अन्य वायरस, बैक्टीरिया आदि का भी पता लगा सकता है। फिलहाल इसकी रिसर्च टीम इस मास्क की प्रोडक्शन को लेकर किसी पार्टनर की लगाश कर रही है।




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