आंदोलनकारी किसान संगठनों की शुक्रवार को होने वाली बैठक रद्द हो गई है। अब बैठक शनिवार (26 दिसंबर) को होगी। किसान बैठक कर केंद्र की चिट्ठी चर्चा करेंगे। किसान पहले आज बैठक करने वाले थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद किसानों ने फैसला लिया कि अब बैठक शनिवार को होगी और केंद्र की चिट्ठी पर चर्चा की जाएगी। साथ ही सरकार के साथ अगली वार्ता पर भी विचार किया जाएगा।
बता दें कि पीएम मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना के तहत नौ करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी करने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि एक बार फिर नम्रता से किसान हित में सरकार मुद्दों और तथ्यों के आधार पर बातचीत को तैयार है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार अन्नदाता को उन्नत करने के प्रति समर्पित है ।इससे आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को लोकतंत्र में अटूट आस्था है और नए कृषि कानूनों को तर्क की कसौटी पर कसा जा सकता है।
बता दें कि केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डरों पर किसानों के प्रदर्शन को एक महीना पूरा होने वाला है। आंदोलनरत किसान संघों ने गुरुवार को आरोप लगाया कि वार्ता के लिए केंद्र सरकार का ताजा पत्र केवल यह धारणा बनाने के लिए किसानों के खिलाफ किया जा रहा दुष्प्रचार है कि उनकी बातचीत में दिलचस्पी नहीं है। किसानों ने बातचीत फिर शुरू करने के लिए एजेंडा में नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के विषय को शामिल करने की मांग की है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने किसानों को नए सिरे से वार्ता का न्योता भेजते हुए स्पष्ट किया कि एजेंडा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से संबंधित किसी नई मांग को शामिल करना ‘तार्किक' नहीं होगा क्योंकि यह नए कृषि कानूनों के दायरे से परे है। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि वह आंदोलनकारी किसान संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर ‘तार्किक समाधान' खोजने के लिए तैयार है।




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