"ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् ।।"
इस वेद मंत्र गायत्री महामंत्र के बारे में सारे वेद, पुराण, धर्म शास्त्रों में एक मत से कहा हैं कि जो कोई भी नियमित सूर्योदय के 2 घंटे पहले से लेकर सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक उगते सूर्य का ध्यान करते हुये जप करता हैं उसके जीवन के सारे अभाव तो दूर हो ही जाते हैं, साथ मां गायत्री की कृपा से जप करने वाले साधक को ये 10 वरदान स्वतः ही मिलने लगते हैं ।
1. गायत्री मंत्र को पढ़ते समय आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए, जैसे पदमासन, अर्ध पद्मासन और सिद्धआसन। किसी आसान पर बैठकर ही गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।
2. इस मंत्र का जाप नहाधोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर करना चाहिए।
3. अगर माला से गायत्री मंत्र का जप करना चाहते हैं तो 108 मनकों की माला को रखें। इसके लिए तुलसी या चंदन की माला रखें।
4. इस मंत्र को जल्दी -जल्दी नहीं पढ़ना चाहिए। इसके महत्व और अर्थ को समझकर ही उच्चारण करना चाहिए।



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