इस चमत्कारी मंत्र के जप करने से आपके 10 वरदान स्वतः ही मिलने लगते हैं!


"ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् ।।" 
इस वेद मंत्र गायत्री महामंत्र के बारे में सारे वेद, पुराण, धर्म शास्त्रों में एक मत से कहा हैं कि जो कोई भी नियमित सूर्योदय के 2 घंटे पहले से लेकर सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक उगते सूर्य का ध्यान करते हुये जप करता हैं उसके जीवन के सारे अभाव तो दूर हो ही जाते हैं, साथ मां गायत्री की कृपा से जप करने वाले साधक को ये 10 वरदान स्वतः ही मिलने लगते हैं ।


शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र को वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र बताया गया है। इसके जप के लिए तीन समय बताए गए हैं । गायत्री मंत्र का जप का पहला समय है प्रात:काल, सूर्योदय से 2 घंटे पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए । दूसरा समय है दोपहर का- दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है, और तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए ।


गायत्री मंत्र जप करते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए....

1. गायत्री मंत्र को पढ़ते समय आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए, जैसे पदमासन, अर्ध पद्मासन और सिद्धआसन। किसी आसान पर बैठकर ही गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।

2. इस मंत्र का जाप नहाधोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर करना चाहिए।

3. अगर माला से गायत्री मंत्र का जप करना चाहते हैं तो 108 मनकों की माला को रखें। इसके लिए तुलसी या चंदन की माला रखें।

4. इस मंत्र को जल्दी -जल्दी नहीं पढ़ना चाहिए। इसके महत्व और अर्थ को समझकर ही उच्चारण करना चाहिए।

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