दुनिया की पहली कोरोना वैक्‍सीन पर नहीं हो रहा किसी को भरोसा, जानिए 5 अहम वजह!


लंबे इंतजार के बाद रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन को मंजूरी दे दी है। खुद रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने इसका ऐलान किया है। उन्‍होंने बताया कि रूस के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने इस कोरोना वायरस वैक्‍सीन को अपनी मंजूरी दे दी है। राष्‍ट्रपति पुतिन ने यह भी बताया कि उनकी बेटियों को यह टीका लगाया जा चुका है। मॉस्‍को के गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट ने एडेनोवायरस को बेस बनाकर यह वैक्‍सीन तैयार की है। लेकिन दुनिया इस रूसी वैक्सीन को संदिग्ध नजरों से देख रही है और वैक्सीन पर कई सवाल उठ रहे हैं. आइए जानते हैं किन वजहों से रूसी वैक्सीन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


1. रूसी वैक्सीन पर सवाल उठने के पीछे एक बड़ी वजह ये है कि इस वैक्सीन के बारे में उतनी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है जितनी होनी चाहिए थी। मतलब कब ट्रायल शुरू हुए और कितने वक्त तक किए गए? कितने लोगों को शामिल किया गया? वैक्सीन के क्या साइड इफेक्ट रहे?

2. किसी भी वैक्सीन के लिए तीसरे फेज का ट्रायल काफी अहम होता है जब हजारों लोगों पर लंबे वक्त तक वैक्सीन के प्रभाव की जांच की जाती है। लेकिन रूस की कोरोना वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल अभी पूरा नहीं हुआ है।


3. दुनिया को यह चिंता है कि रूस राजनीति या प्रोपेगैंडा के मकसद से जल्दबादी में वैक्सीन के सफल होने का ऐलान कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पिछले हफ्ते चेतावनी दे चुका है कि रूस को टेस्टिंग के परंपरागत तरीकों को छोड़कर वैक्सीन तैयार नहीं करना चाहिए।

4. वहीं, WHO ने दुनियाभर की तमाम वैक्सीन की लिस्ट तैयार की है जिनके ट्रायल चल रहे हैं। लेकिन अभी तक इस लिस्ट में रूसी वैक्सीन नहीं है।


5. न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि पिछले हफ्ते रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय को वैक्सीन के इंसानी ट्रायल और किसी संभावित साइड इफेक्ट और रिसर्च वगैरह को लेकर विस्तृत सवाल भेजे गए थे, लेकिन मंत्रालय ने जवाब नहीं दिया।

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