अक्सर आपने खेल के मैदान में खिलाड़ियों को केला कहते हुए देखा होगा। लेकिन इसके पीछे क्या वजह है की खिलाडी केवल केला ही खाते है। अगर आप भी यह नहीं जानते है तो आज हम आपको बताने जा रहे है इसके पीछे का राज़। वैसे तो केले का सेवन हमे रोज़ाना करना चाहिए।
रिसर्च से यह साबित हो चुका है कि सिर्फ दो केलों का सेवन करने से 90 मिनट तक ऊर्जावान बने रहा जा सकता है। केले से सिर्फ ऊर्जा ही नहीं मिलती, बल्कि ये फिट रहने में भी मदद करता है। रोजाना इसका सेवन करना फायदेमंद होता है। क्योकि केले में तीन प्रकार की प्राकृतिक शुगर पाई जाती हैं- सूक्रोज, फ्रक्टोज और ग्लूकोज।
आजकल प्रदूषण बहुत ही ज्यादा हो चूका है और बच्चों में अस्थमा का मुख्य कारण दूषित वातावरण है। ऐसे में कहा जा सकता है कि आजकल का मौसम बच्चों के लिहाज से बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इसके साथ ही कुछ मांएं अपने बच्चों को स्तनपान नहीं करवाती हैं, जिसका असर बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता और उसकी सेहत पर पड़ता है। जिससे वे अस्थमा सहित कई दूसरी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। अस्थमा श्वास संबंधी रोग है। इसमें श्वास नलिकाओं में सूजन आने से वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।
अस्थमा का अटैक आने पर श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो सकती है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज द्वारा किए गए एक अध्ययन से यह साबित हो चुका है कि बच्चों को रोजाना सिर्फ एक केला दिया जाए तो 34 प्रतिशत अस्थमा का असर कम हो जाता है। जो बच्चे केला खाना पसंद नहीं करते हैं उन्हें सुबह केले और दही या फिर केले और दूध की स्मूदी बनाकर दी जा सकती है। यकीनन बच्चे इसे काफी पसंद करेंगे।



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