इंदौर के आदिवासी अंचल धार, झाबुआ, खरगोन में होली के समय 'भगोरिया उत्सव' मनाया जाता है। इस दौरान भगोरिया उत्सव में काफी बड़ा मेला लगता है। इस उत्सव के दौरान ही आदिवासी समाज में शादियां भी होती हैं। आदिवासी परंपरा के अनुसार, अलग-अलग इलाकों में भगोरिया हाट का आयोजन किया जाता है।वहीं, इन पारंपरिक हाट बाजारों में एक अनोखी परंपरा होती है। यहां आदिवासी युवक-युवतियां सज-धज कर भावी जीवनसाथी का तलाश में आते हैं।
वहीं जब इनका जीवनसाथी इन्हें तलाश के दौरान मिल जाता है। तो रजामंदी करने का तरीका भी निराला होता है। भगोरिया हाट में युवक किसी भी आदिवासी युवती को पान खाने के लिए दे सकता है। अगर लड़की ने वह पान खा लिया तो, इसे उसकी रजामंदी मान लिया जाता है। पान खाने को युवती की हां माना जाता है। जिसके बाद ये समझ लिया जाता है कि लड़की ने आपके द्वारा दी गए शादी के प्रस्ताव स्वीकर कर लिया है जिसके बाद परिवार इसका विरोध नहीं करते हैं और दोनों की शादी कर दी जाती है।



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