पुत्र संतान के लिए
कामसूत्र के अनुसार इसके लिए स्त्री को हमेशा पुरुष के बाएं तरफ सोना चाहिए। कुछ देर बाएं करवट लेटने से दायां स्वर और दाहिनी करवट लेटने से बायां स्वर चालू हो जाता है। ऐसे में दाईं ओर लेटने से पुरुष का दायां स्वर चलने लगेगा और बाईं ओर लेटी हुई स्त्री का बायां स्वर चलने लगता है। यदि ऐसा संभव हुआ तो तभी संभोग करना चाहिए। इस स्थिति में अगर गर्भाधान हो गया तो अवश्य ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। साथ ही इसके विपरीत नियमों को अपनाने पर संतान के रूप में कन्या की प्राप्ति होती है।
कन्या संतान के लिए
कामसूत्र के अनुसार कन्या संतान के लिए स्त्री को हमेशा पुरुष के दाहिनी ओर सोना चाहिए। इस स्थिति में स्त्री का दाहिना स्वर चलने लगेगा और पुरुष का बायां स्वर चलने लगेगा। इसके बाद संभोग करने पर यदि गर्भाधान होता है, तो निश्चित ही आपको एक सुयोग्य और गुणवती कन्या संतान प्राप्त होगी।



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