पुलिस ने शनिवार को हजारों की संख्या में 'आजादी के लिए मार्च' निकाले जा रहे हजारों लोगों को उस वक्त रोक दिया, जब वह नियंत्रण रेखा (एलओसी) के करीब बढ़ते जा रहे थे।
हजीरा क्षेत्र के दवारंडी गांव में जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के सरदार मोहम्मद सगीर के नेतृत्व वाले गुट द्वारा मार्च का आयोजन किया गया था।
डीआईजी पुंछ ताहिर महमूद कुरैशी ने डॉन न्यूज को बताया कि मार्च को रोकने का निर्णय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया।
उन्होंने कहा, "पार्टी नेताओं को एक निश्चित दूरी तक जाने की इजाजत दी गई थी, लेकिन वह उससे आगे बढ़ गए, जबकि उन्होंने लिखित में दिया था कि वह तय सीमा से आगे नहीं जाएंगे। भारतीय गोलीबारी में किसी की जान भी जा सकती थी। इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।"
खबरों के अनुसार, कुछ लोगों पास की पहाड़ियों पर चढ़ गए और उन्होंने पुलिस पर पत्थर फेंके। उन्होंने आगे कहा कि मार्च को शांत करने के लिए पुलिस ने आंसूगैस के गोले दागे।
कुरैशी ने कहा कि पूरे मामले में 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनमें से तीन को किसी भी प्रकार की गतिविधियों में नहीं पाए जाने के चलते रिहा कर दिया गया।



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