इमरान खान ने रविवार को भारत के परमाणु शस्त्रागार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इस पर संज्ञान लेने की अपील की।
खान ने ट्विटर पर कहा कि फासीवादी और नस्लवादी हिंदू वर्चस्व वाली मोदी सरकार के नियंत्रण में भारत के परमाणु हथियार की सुरक्षा पर गंभीर विचार करने की जरूरत है।
भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि इस्लामाबाद से अब सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मसले पर बातचीत होगी।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने भारत के गृहमंत्री अमित शाह के उस बयान को दोहराया जिसमें उन्होंने कहा कि पीओके और अक्साई चीन कश्मीर का हिस्सा है। खान ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा कि भारत में मुस्लिमों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है और आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के गुंडे उपद्रव मचा रहे हैं।
पाकिस्तान ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने और कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटने को राज्य-हरण करार दिया।
संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत ही जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त था।
भारत पर प्रतिबंध लगाने के मकसद से पाकिस्तान ने पूरी दुनिया के नेताओं से संपर्क किया लेकिन उसके अच्छे-बुरे दिनों का साथी चीन के सिवा अन्य देशों को इस बात के लिए मनाने में वह विफल रहा।
उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का भी दरवाजा खटखटाया जहां इस मसले पर शुक्रवार को सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के बीच बंद कमरे में मंत्रणा हुई लेकिन वहां भी चीन को छोड़ यूनएससी के पांच स्थायी सदस्यों में से अन्य सभी ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में भारत के विकास के एजेंडे का समर्थन किया।
इमरान ने ट्वीट में कहा, "भारत का परमाणु हथियार हिंदू वर्चस्ववादी व फासीवादी नेतृत्व के नियंत्रण में हैं। इसकी सुरक्षा पर दुनिया गंभीरता से विचार करे, क्योंकि इसका प्रभाव केवल क्षेत्र में ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।"
उन्होंने ट्वीट में कहा, "भारत पर हिंदू वर्चस्ववादी विचारधारा और नेतृत्व ने उसी तरह कब्जा कर लिया है, जिस तरह जर्मनी पर नाजियों ने किया था।"
इमरान ने एक अन्य ट्वीट में कहा, "हिंदू वर्चस्ववाद से न केवल भारत में, बल्कि पाकिस्तान में भी अल्पसंख्यकों को खतरा है। यह खतरा पाकिस्तान तक बढ़ गया है।"

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