दिल्ली पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में आरोपी असलम ने बताया करीब सात साल पहले वह नेपाल से दिल्ली आ गया। दिल्ली पहुंचने पर वह पूर्वी दिल्ली इलाके के गांधी नगर में नौकरी करने लगा। कुछ समय बाद असलम वापस जब नेपाल गया तो वहां उसकी मुलाकात माजिद नाम के एक शख्स से हुई। माजिद नेपाल के रास्ते पाकिस्तान से आई जाली मुद्रा के काले-कारोबार में लिप्त था। धीरे-धीरे माजिद ने असलम के साथ मिलकर दिल्ली, बिहार तथा कुछ अन्य स्थानों पर जाली भारतीय मुद्रा की सप्लाई शुरू कर दी थी।
डीसीपी कुशवाहा ने आगे बताया, "भारत में जाली भारतीय मुद्रा चलाने वाले गिरोह के बारे में काफी समय से गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। इस सूचना के आधार पर ही आगे की जांच के लिए इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह, सब-इंस्पेक्टर संजीव, सहायक उप-निरीक्षक देवेंद्र भाटी, हवलदार हेमंत, संजीव शाह, सिपाही दीपक और मोहित की एक विशेष टीम बनाई गई।"
असलम अंसारी 24 अगस्त को एसीपी अतर सिंह के नेतृत्व वाली स्पेशल सेल की टीम को पुलिस के हाथ लग गया। नेहरू प्लेस बसअड्डे से गिरफ्तार हुए असलम ने पुलिस को कई सनसनीखेज जानकारियां दीं। पुलिस को असलम के पास से 2000 के 275 जाली नोट मिले। इस सिलसिले में पुलिस ने स्पेशल सेल थाने में मामला दर्ज किया है।

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