हैयर कलर्ज में मौजूद पीपीडी गंभीर एलर्जी रिएक्शन उत्पन्न करने के साथ महिलाओ में ब्रेस्ट कैंसर भी कारण है। जिनमें से कुछ को तो कैंसर का कारण भी माना गया है। इसके अलावा भी आपको बहुत सी अन्य स्वास्थ्य समस्यायों सामना करना पड़ सकता है। हर प्रकार के हैयर कलर के उत्पादन में अमोनिया की जगह अमाइन्स (Amines) पाया जाता है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 30% गैर Hodgkin लिंफोमा(Non-Hodgkin Lymphoma) के मामले नियमित रूप से हैयर कलर करने वालें लोगो में पाये गए है।
ब्रिटेन में रहने वाली 17 वर्षीय तबिथा मकौर्ट (Tabitha McCourt) की रसायनिक क्रिया के कारण बाल कलर करने के 20 मिनट के अंदर ही मृत्यु हो गयी थी। मिली जानकारी के अनुसार जो महिलाए 5 साल या उससे अधिक समय से सैलून उद्योग में काम कर रही है उनमें ये समस्या अधिक पायी जाती है। यह लसीका ऊतक (Lymph Tissue) का कैंसर है और जैसे यह बढ़ता जाता है। बालों में चमक लाने के लिए P-PHENYLENEDIAMINE (पीपीडी) नामक रसायन का उपयोग किया जाता है जो कई प्रकार की एलेर्जी होने का कारण है। और इसके अलावा सिर में खुजली होना या लाल हो जाना, रूसी, आंखों और पलकों के आसपास सूजन जैसे कई लक्षण भी सामने आ सकते है।
लाखों लोगों को पहले से ही पराग,मिट्टी और रसायनों से श्वास एलर्जी होती है। लगातार काम में लेने से यह नाक के ज़रिये शरीर के अन्दर खांसी,गले में तकलीफ,घरघराहट,फेफड़ों की सूजन और पूर्ण विकसित अस्थमा जैसी स्वास्थ्य समस्यायों का कारण बनता है। यदि आप अक्सर अपने बाल कलर करते है तो रंगों में मौजूद रसायनों के कारण आपके बाल अधिक संसाधित हो जाते है। इसीलिए हर हैयर कलर के अंदर आपको निर्देश के तौर पर “पैच परीक्षण” करने के लिए सलाह दी जाती है।
जो लोग फेफड़ों की सूजन से परेशान होते है उन लोगो में हैयर कलर इस्तेमाल करने के कारण दमा होने की संभावना अधिक होती है। ब्लीचिंग एजेंट्स और हैयर कलर में परसलफटेस पाये जाते है और लगभग 60% वाणिज्यिक बाल उत्पादों में यह पाया जाता है। और कभी तो इस समस्या को दूर करने के लिए अपने बालों को कटवाना पड़ता है।





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