रावण का पहला उपदेश :- 'इंसान को कभी भी अपने शत्रु को खुद से कमजोर नहीं समझना चाहिए, क्योंकि कई बार जिसे हम कमजोर समझते हैं वहीं हमसे ज्यादा ताकतवर साबित हो जाता है।'
रावण का दूसरा उपदेश :- 'खुद के बल का दुरुपयोग कभी भी नही करना चाहिए. घमंड इंसान को ऐसे तोड़ देता है, जैसे दांत किसी सुपारी को तोड़ता है।'
रावण का तीसरा उपदेश था :- 'इंसान को हमेशा अपने हितैषियों की बातें माननी चाहिए, क्योंकि कोई भी हितैषी अपनों का बुरा नहीं चाहता।'
रावण का चौथा उपदेश था :- 'हमें शत्रु और मित्र की हमेशा पहचान करनी चाहिए. कई बार जिसे हम अपना मित्र समझते हैं वे ही हमारे शत्रु साबित हो जाते हैं और जिसे हम पराया समझते हैं असल मे वे ही हमारे अपने होते हैं।'
रावण का पांचवां उपदेश था :- 'हमें कभी भी पराई स्त्री पर बुरी नजर नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि पराई स्त्री और बुरी नजर डालने वाला इंसान नष्ट हो जाता है।'

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