मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, यह फैसला पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कृषि विश्वविद्यालय, फैसलाबाद (यूएएफ) ने किया है। यहां वेलेंटाइन्स डे को पश्चिमी देशों की संस्कृति का हिस्सा होने पर बहस चल रही है। यह फैसला पूर्वी देशों की संस्कृति और इस्लामी परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। विश्वविद्यालय की उप कुलपति जफर इकबाल ने इस बात का जिक्र वेबसाइट पर भी किया है।
'वेलेंटाइन्स डे' के स्थान पर 'सिस्टर्स डे' मनाने के फैसले के साथ ही विस्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी करके कहा है, कि 'विश्वविद्यालय 14 फरवरी (वैलेंटाइन्स डे) को महिला छात्रों के बीच विश्वविद्यालय के चिन्ह वाला स्कार्फ, शॉल और और गाउन बांटने के योजना पर विचार कर रहा है।'
बता दें कि, एक तरफ जहां पाकिस्तान में युवाओं के बीच वेलेंटाइन्स डे लोकप्रिय हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कोर्ट ने भी इस त्योहार पर शख्ती बरती थी। 2017 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक जगहों और सरकारी दफ्तरों में वेलेंटाइन्स डे मनाने पर रोक लगाई थी। इसके अलावा बीते साल मीडिया संस्थानों को भी वेलेंटाइन्स डे को बढ़ावा नहीं देने के लिए कहा गया था।

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