सोशल बैवसाइट सर्वे करने वाली एक आईटी कंपनी की हालिया रिपोर्ट चौंकाती है, जिस में पोर्न बेस्ड सर्वे के आधार पर ये आंकड़े दिए गए हैं कि देश में 22 से 34 आयुवर्ग के युवा पोर्नोग्राफी, पेड सैक्स, बैव सैक्स चैट के जरिए अपनी पौकेट ढीली कर रहे हैं। उन की कमाई का लगभग 20 से 30 हिस्सा पेड सैक्स के लिए जा रहा है।
क्या है पेड सैक्स
सैक्स के लिए जो रकम अदा की जाती है उसे पेड सैक्स कहा जाता है। इस के कई रूप हो सकते हैं। वर्चुअल सैक्स से ले कर लाइव फिजिकल सैक्स तक। सैक्स के इन तमाम माध्यमों में कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पैसे इनवैस्ट किए जाते हैं। सैक्स के तमाम माध्यमों में सीधे इनवैस्टमैंट को पेड सैक्स कहते हैं।
सैक्स की राह नहीं आसान
कुछ दशक पहले तक सैक्स तक आम लोगों की आसान पहुंच थी। छोटीमोटी रकम अदा कर के यौनसुख का आनंद उठाया जा सकता था, पर सैक्स के विभिन्न मौडल सामने आने के बाद उस की दरों में कई गुणा वृद्धि हुई है।
क्या है इन की कैटेगरी व प्रचलित दरें
# औनलाइन पेड सैक्स : प्रति मिनट डेटा चार्जेज
# फोन फ्रैंडशिप : 2 से 3 हजार रुपए प्रतिमाह सदस्यता
# कौलगर्ल औन डिमांड : 2 से 10 हजार रुपए प्रति घंटा
# स्कौर्ट सर्विस (श्रेणी एबीसी ) शुरुआती दर
# ब्रोथल सैक्स : 500 से 1,500 रुपए तक नाइट/आवर
# हाउस सर्विस : पर शौट (हाउसवाइफ, कालेज/वर्किंग वूमन) 3 से 5 हजार रुपए पर शौट
मार्केट में चल रही इन दरों को देख कर आसानी से यह कहा जा सकता है कि ऐक्स्ट्रा मैरिटल सैक्स की चाह रखने वालों को अब मनी कैपेबिलिटी भी ऊंची रखनी होगी। यौनतृप्ति की राह आसान नहीं है। सैक्स के बाजार ने एक बड़ा रूप ले लिया है, जहां जिस की जितनी हैसियत है उस हिसाब से यौन संतुष्टि पा सकता है।




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