1. ज्योतिष की माने तो गर्भवस्था के दौरान नौ महीने तक पति-पत्नी दोनों को ही दक्षिण दिशा की तरफ सिर करके सोना चाहिए।
2. साथ ही अगर घर में कोई गर्भवती स्त्री हो तो फिर घर के दक्षिण-पूर्वी कोने में शाम के समय एक दीपक जलाया जाना चाहिए, माना जाता है कि इससे बच्चे पर शुभ प्रभाव पड़ता है।
3. गर्भवती महिला और उसके बच्चे को नकारात्मक शक्तियों से बचाने में मोर पंख मददगार साबित हो सकता है .. दरअसल वास्तु में मोर पंख को बहुत पवित्र माना जाता है, वास्तु की माने तो इसे घर में रखने से इससे आस-पास की नकारात्मकता दूर हो जाती है।
4. साथ ही नकारात्मकता दूर करने के लिए पीले चावलों को भी प्रयोग किया जा सकता है। असल में पीले चावलों को भी मंगल सूचक माना जाता है, ऐसे में अगर गर्भवती महिला इन्हें अपने पास रखती है तो इससे बच्चे और मां पर नकारात्मक शक्तियों का असर नहीं होता है।
5. साथ ही प्रेग्नेंट महिला के कमरे में भगवान कृष्ण के बाल रुप की ऐसा चित्र लगाएं जिसमें वो मां यशोदा के साथ खेल रहे हों.. ये तस्वीर इस तरह लगाएं कि गर्भवती महिला की सुबह उठते ही उस पर पहली नजर पड़े .. इससे बच्चे के अंदर भगवान श्री कृष्ण के समान आदर्श गुणों का बीजारोपण होता है।
6. साथ ही गर्भवती महिला के कमरे में भगवान कृष्ण की मूर्ति भी अवश्य रखनी चाहिए .. इससे अगर उस कमरे का वास्तु ठीक नहीं हो तो उससे बचाव होता है साथ ही शिशु का स्वास्थ्य भी उत्तम रहता है ।
7. इसके साथ ही नकारातमकता को दूर करने के लिए तांबे की वस्तु भी पास रखी जा सकती है।
8. वहीं सफेद रंग को सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है .. ऐसे इस रंग के खिलौने और चित्रो से कमरों को सजाया जा सकता है। इससे गर्भवती महिला के मन-मस्तिष्क और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और बच्चा भी हंसता खेलता रहता है।

एक टिप्पणी भेजें