इतिहासकारो के अनुसार कामसूत्र की किताब के दूसरे आध्याय में संभोग की बात कही गई है। और संभोग की कुछ पोजिशनस को विस्तार से समझाया गया है। लेकिन एक बात जो गौर करने वाली है वो ये कि ये किताब पुरुष और महिला दोनो के विचारों का सम्मान करती है और सेक्स के लिए महिला की सहमति जरूरी मानती हैं। इसके अलावा भारत के कई प्राचीन मंदिरों की दीवारों पर उकेरी गई देवी देवताओं की कला कृति यहाँ आने वाले पर्यटकों को उत्तेजित करती है। कई मूर्तियों में अप्सराओं को श्रंगार करते हुए, मटके से पानी ले जाते हुए दिखाया है तो कई मूर्तियों में पुरुष महिला के कामुक मुद्राओं को दिखाया है, जो ये साबित करती है उस वक्त के समाज की सोच कितनी परिपक्व थी।
जिन चीजों पर समाज का कोई भी वर्ग खुलकर बात करना तक पसंद नही करता। उसी देश में कई ऐसे अवशेष हैं जो इसे कामसूत्र की जन्मभूमि की तरफ इशारा करते हैं। भारत में कई एक के बाद एक कई धर्मों का आगमन हुआ और यही कारण है कि बहुत से विशेषज्ञ भारत में कामुकता के पतन का कारण मुगलो को मानते हैं। क्यों मुगलों में महिलाओं पर और खुले विचारों पर काफी बंदिशे थी। लेकिन बदलते दौर के साथ कई लोगो ने अपनी संस्कृति में सही और गलत चीजों की व्याख्या करना शुरू कर दी। जिसमें संभोग को गलत माना गया।



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