1. ज्योतिषो के अनुसार वीर्य की अधिकता से पुरुष (पुत्र) उत्पन होता है। रक्त (रज) की अधिकता से स्त्री (कन्या) उत्पन होती है। वीर्य और रज समान हों तो किन्नर संतान उत्पन होती है।
2. ऐसा माना जाता है कि किन्नरों की दिल से दी हुई दुआ और बदुआ दोनों ही असरदार होती है। इसलिए किन्नरों की दुआ पाने के लिए लोग उन्हें दिल खोलकर दान देते है।
3. नए किन्नर को शामिल करने से पहले नाच-गाना और सामूहिक भोज होता है किसी नए वयक्ति को किन्नर समाज में शामिल करने से पहले बहुत से रीती-रिवाज़ का पालन किया जाता है।
4. किन्नरों की शव यात्रा को रात के 2 बजे गुप्त तरीके से निकाला जाता है। इसके अलावा उन्हें चप्पलों से मारना जैसी रिवाज भी किए जाते है।
5. ऐसा माना जाता है की कुंडली में बुध, शनि, शुक्र और केतु के अशुभ योगों के कारण व्यक्ति किन्नर या नपुंसक पैदा हो सकता है।
6. ऐसा माना जाता है कि किन्नरों का मौत का मातम मनाने से वो अगले जन्म में भी ऐसा ही पैदा होता है। इसलिए उनकी शव यात्रा को धूम-धाम से निकाला जाता है।
7. किन्नर नवजात शिशु को हाथ में लेकर ही पहचान लेते है कि वो लड़का है या लड़की।
8. जन्म से मृत्यु तक एक जैसे रहने वालें किन्नर भी दो तरह के होते है- स्त्री और पुरूष किन्नर।
9. शास्त्रों के अनुसार किन्नरों का जन्म पुराने जन्म के पापों के कारण होता है। इसलिए उनकी शादी केवल एक दिन के लिए ही होती है।
10. बहुत कम लोग जानते है कि मुगल जमाने में किन्नर बादशाह की बेगम की देखभाल किया करते थे।
11. एक मान्यता के अनुसार किन्नरों का जन् ब्रहमा जी की परछाई से हुआ है। जबकि दूसरी मान्यता के अनुसार अरिष्टा और कश्यप त्रषि के कारण किन्नरों का जन्म हुआ।
12. हिन्दु धर्म के अनुसार रीति-रिवाज निभाने वाले किन्नरों के गुरू मुस्लिम होते है।
13.समाज को किसी किन्नर की मौत की खबर तक नहीं होती।
14. अगले जन्म में किन्नर न बनने के लिए वो बहुचरा माता से मांफी मांगते है, ताकि उन्हें अगले जन्म में यह रूप न मिलें।
15. महाभारत में जब पांडव एक वर्ष का अज्ञात वास जंगल में काट रहे थे, तब अर्जुन एक वर्ष तक किन्नर वृहन्नला बनकर रहे थे एक मान्यता के अनुसार किन्नरों की उत्पत्ति ब्रह्माजी की छाया से हुई है।



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