1. अक्सर लड़कियों को बताया जाता है कि पहले दो दिन बाल नहीं धोने चाहिए. इस सलाह का कोई आधार नहीं है। इसके विपरीत गर्म पानी से नहाने पीरियड्स के दर्द से राहत मिल सकती है।
2. जिस जमाने में ये नियम बने होंगे, तब आज जैसे बाथरूम यकीनन नहीं हुआ करते थे। जिस नहर से पीने का पानी भरना हो, वहीं नहाना पानी को दूषित कर सकता था। लेकिन अब ना तो महिलाओं के नहाने में कोई समस्या है, बल्कि टैम्पॉन लगा कर स्विमिंग भी की जा सकती हैं।
3. जब पहली बार लड़कियां पीरियड्स को महसूस करती हैं, तब ज्यादातर माएं सबसे पहली सलाह यही देती हैं। ऐसा तब है जब देश में ऐसे भी कई मंदिर हैं जहां देवी के "उन दिनों" की पूजा की जाती है। महाराष्ट्र में पहले पीरियड्स पर पूजन होती है। अगर पहली बार पवित्र है तो उसके बाद अपवित्र क्यों?
4. ये कुछ वैसा ही है जैसे छोटे बच्चों को डराना हो तो कह दिया जाता है कि बात नहीं मानोगे तो भूत पकड़ के ले जाएगा। पीरियड्स के दौरान हार्मोन ज्यादा सक्रिय होते हैं। मसालेदार खाने से उनके संतुलन में गड़बड़ हो सकती है लेकिन अचार को आपसे कोई खतरा नहीं है।
5. पीरियड्स के शुरुआती दिनों में शरीर कमजोरी महसूस करता है, इसलिए आराम करना जरूरी है. ये ना करो, वो ना करो का एक ही तर्क समझ आता है कि आराम कर लो। लेकिन यह सोचना कि उस दौरान सेक्स कर लेंगे तो आपके पार्टनर से उसकी मर्दानगी छिन जाएगी सिर्फ बेवकूफी है।
6. जहां लोग बड़े परिवारों में रहते है, वहां आज भी इसे माना जाता है. लेकिन जहां पति पत्नी ही हैं, वहां कोई इसकी परवाह नहीं करता। तो जब छोटे परिवार का खाना दूषित नहीं होता, तो फिर बड़े परिवार का कैसे हो जाएगा?
7. यह एक अलग ही स्तर है, जहां महिलाओं को अपने बिस्तर, अपने कमरे में भी सोने नहीं दिया जाता। इससे सिर्फ इतना फायदा हो सकता है कि रात में गलती से बिस्तर पर दाग नहीं लगेगा, गद्दा धुलवाना नहीं पड़ेगा लेकिन महिला को जो तकलीफ होगी उसका क्या?

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