पहले यह माना जाता था कि यह एबिलिटी अनुवांशिक होती है यानी मां बाप से मिले जिन पर निर्भर करती है। लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ द इंग्लैंड के अंसरी बायो लार्जेस्ट ने बताया कि यह किसी सिंगल जिन के कारण नहीं होती बल्कि इस में पर्यावरण का भी योगदान होता है। कभी भी आप अपनी बोहो को एक साथ नहीं चढ़ा सकते। अपनी नाक को जीभ से छुना बहुत ही कठिन होता है।
कभी भी आप अपने बिना छुए कानों को मोड़ नही सकते हैं। यह कर पाना भी 10 से 20% लोग ही कर पाते हैं। कभी भी आप अपनी कोहनी को चाट नहीं सकते हैं। दोनों पैरों के पंजों को विपरीत दिशा में घुमाना भी आपके लिए बहुत ही कठिन होगा। अपने आप को कभी भी गुदगुदी करिए तो बहुत कम ही ऐसे लोगों के जिनको हंसी आती होगी और उनको गुदगुदी होती होगी।

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