यह परम्परा महिलाओं को अपने टैलेंट का प्रदर्शन करके पुरुषों को खुश करने के लिए करनी पड़ती है। ये सब करने के लिये उनको पैसे मिलते है। ऐसा करने वाली महिलाओं को गीशा कहते हैं और ये पुरुषों के सामने सज-धज का नाचती-गाती हैं।
ये महिलाएं कठिन ट्रेनिंग लेकर ऐसा करती हैं। यह परम्परा 400 साल पुरानी है और जापान में यह परंपरा पिछले 400 साल से चलती आ रही है। ये महिलाएं अपने पारंपरिक ड्रेस में सजी हुई दिख रही हैं। ये महिलाएं अपने चेहरे पर मोटा व्हाइट मेकअप, डार्क आईलाइनर और होठों पर लाल लिपिस्टिक में दिखाई देती हैं।
परम्परा के अनुसार गीशा हाउस के लिए लड़कियों का चयन होने पर उन्हें कई सालों तक पहले ट्रेनिंग दी जाती है। लड़कियों को ट्रेनिंग देती है। इन सबको गीशा हाउस में ही रहना होता है।
सबसे पहले इन महिलाओं को म्यूजिक, डांस और कस्टमर को खुश करने वाली बातचीत सीखना जरूरी होता है। गीशा बनना आसान काम नहीं है। लेकिन महिलाओं के गीशा बनने को एक अचीवमेंट के तौर पर देखा जाता है और उन्हें काफी सम्मान भी मिलता है। ट्रेनिंग के दौरान महिलाओं को गीशा हाउस के सारे काम भी करने पड़ते हैं। और उन्हें बड़ों के प्रति पूरा सम्मान दिखाना पड़ता है। ट्रेनिंग इतनी कठिन होती है। की कई ओरते इस ट्रेनिंग को अधूरा ही छोड़ देती है।




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