यह पारदर्शी सा दिखने वाला बहुत लंबा केंचुल होता है जो एक निश्चित समय और दौर में सांप स्वयं छोड़ देता है। सांप को कोई आम जीव नहीं बल्कि धार्मिक तौर से जोड़कर देखा जाता है। क्योंकि यह शिव के गले में भी रहता है। जैसे पुरानी त्वचा के मृत होने के बाद नई त्वचा उसकी जगह ले लेती है। सांप के साथ भी ऐसा होता है, जब उसकी पुरानी त्वचा मृत हो जाती है तो वह अपना केंचुल उतारकर नई त्वचा धारण कर लेता है। केंचुल उतारने की प्रक्रिया सांप के लिए बेहद फायदेमंद होती है। ऐसा माना जाता है अपना केंचुल उतारकर सांप अपनी उम्र बढ़ाता रहता है। जो सांप निरंतर ऐसा करते रहते हैं उन्हें अमरता प्राप्त हो जाती है।
सांप की त्वचा में अगर कोई भी खराबी या बीमारी लग जाती है तो वह जल्द से जल्द अपना केचुल उतारने की कोशिश करता है। इससे उसे नई और साफ त्वचा मिल जाती है। यह उसे किसी भी संक्रमण से भी मुक्त करती है। सामान्य रूप से एक धामन सांप अपने जीवन में 3-4 बार केंचुल उतारता है। लेकिन सांप अपने पूरे जीवन में कितनी बार केंचुल उतारेगा यह बात उसकी उम्र, स्वास्थ्य, उसके आश-पास के रहने की जगह पर निर्भर करती है।



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