1. नाभि का निशान :- बच्चा जब मां की कोख में होता है तो नाभि से ही भूर्ण जुड़ा होता है। जन्म के बाद ही बच्चे को मां की नाभि से जुड़े गर्भनाल से अलग किया जाता है।
2. बैक्टीरिया :- नाभि में शरीर के बाकी हिस्सों में से सबसे ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। शोध में कहा गया है कि सिर्फ नाभि में ही 1400 प्रकार के कीटाणु मौजूद होते हैं। इसके लिए जरूरी है नाभि की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए। इससे सेहत को भी नुकसान पहुंच सकता है।
3. नाभि चक्र :- आयुर्वेद में नाभि चक्र का बहुत महत्व है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह शरीर के सात एनर्जी प्वांइट में से एक है। यह इंसान की क्रिएटीविटी,खुशियों और भावुकता से जुडी होती है। नाभि मानसिक सेहत के लिए भी प्रभावशाली है।
4. 6 महीने में होती है ठीक :- जन्म के बाद बच्चे की नाभि पूरी तरह से ठीक होने में कई बार 6 महीने का समय भी लग सकता है। इससे होने वाली इंफैक्शन से बचने के लिए इसकी सफाई रखनी जरूरी है।

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