सरकार का कहना है कि मैरीड वुमन कॉलेजों में भटकाव पैदा करती हैं, वही टीओई की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने यह नियम एक साल पहले ही लागू कर दिया है। 23 आवासीय कॉलेजों के करीब 4 हजार सीटों पर एडमिशन इस नियम से होता है। इन कॉलेजों में महिला कैंडिडेट को सभी चीजें मुफ्त में बाटी जाती है।
सोसायटी के कंटेंट मैनेजर ने बताया कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि शादीशुदा महिलाओं को एडमिशन देने पर उनके पति भी कॉलेज विजिट करते हैं। इससे बाकी महिलाओं का ध्यान भटक सकता है तो वही सोसाइटी के सेक्रेटरी का कहना है कि आवासीय कॉलेजों का मकसद था कि बाल विवाह रुक सके। इसलिए हम शादीशुदा लड़कियों को प्रोत्साहित नहीं करते।

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