श्रुति कुछ अलग करना चाहती थीं और उन्होंने अपने दिल की सुनी और एक अलग सोच के साथ अपनी कंपनी बनाई। दरअसल, यह आइडिया उनको तब आया जब कुछ साल पहले श्रुति के दादा जी की मृत्यु हो गई और उस दिन सब कुछ अस्त-व्यस्त था। अंतिम संस्कार का सामान जुटाने के लिए सभी परेशान हो रहे थे। इसलिए श्रुति ने एक ऐसी कंपनी चलाई, जो संस्कार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
श्रुति कहना है कि जब लोगों को पता चला कि मैं ऐसा करने जा रही हूं, तो कुछ लोगों ने मुझे ऐसा काम न करने की सलाह दे डाली और मेरी मां ने तो मुझसे दो महीने तक बात ही नहीं कीं। इस काम में केवल श्रुति ही नहीं ब्लकि चार लोग ओर जुड़े हुए है। अगर किसी के घर में मौत होती है तो एक फोन आने पर उसकी सारी टीम वहां पहुंच जाती है और अंतिम संस्कार का सारा सामान उपलब्ध करवाती है।
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