अध्ययन में शामिल आधी महिलाओं को कृत्रिम वीर्यारोपण के बाद उठे घुटनों के साथ 15 मिनट के लिए बेड पर लेटे रहने को कहा गया। बाकी महिलाएं तुरंत बेड से हट गईं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं को बेड पर ही रहने को कहा गया था, उनमें प्रेग्नेंट होने के कोई लक्षण ही नही दिखे। इस लिहाज से इंटरकोर्स के बाद बेड पर लेटे रहने की वजह से प्रेंग्नेंट होने वाली बात गलत है।
इन तथ्यों पर प्रतिक्रिया देते हुए शफील्ड यूनिवर्सिटी के प्रफेसर ऐलन पीसी ने कहा कि उन्हें इन तथ्यों पर कोई हैरानी नहीं है क्योंकि स्पर्म सेल्स को गर्भाशय नली तक पहुंचने में केवल पांच मिनट का समय लगता है जिसके बाद वे कई दिनों तक गर्भाशय में जीवित रह सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘सांस के सामान्य होने (शारीरिक संबंध के बाद) और पेशाब करने के लिए बेड से उठने तक यह (स्पर्म) अंडे को फर्टिलाइज करने के लिए पहुंच जाता है।’
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