OMG! यह बच्ची बचपन में खाती थी कांच,लोहा और प्लास्टिक..!!


भूख एक ऐसी चीज़ है, जो आपसे हर काम करवा सकता है। हम काम ही करते है अपना पेट पालने के लिए। खेर आप सबने बचपन में मिटटी तो खायी ही होगी।  हम सब की आदत होती है बचपन में मिटटी खाने की। लेकिन क्या अपने इस हट के कुछ सुना है की, कोई कांच या प्लास्टिक खता हो। जी हाँ आज हम आपको एक ऐसी बच्ची के बारे में बताएंगे जो ये सब चीज़े खाती है।

यह कहानी उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के चकलवंसी गांव की है। चकलवंसी गांव के मजरे में रहने वाली रीता भले ही 8 साल की हो गई है, लेकिन रीता की अनोखी आदत यानी लोहा, कांच, प्लास्टिक उसके खाने का हिस्सा बन चुकी है। हालांकि यह रीता का शौक नहीं, बल्कि यह उसकी मजबूरी है, जो आदत में बदल गई है। रीता जब 4 साल की थी तो उसकी माँ के देहान्त के बाद गरीब पिता रोटी के जुगाड़ मे जुट गया और भूख से बिलबिलाई रीता ने प्लास्टिक,लोहा और कांच खाना शुरू कर दिया फिर क्या था जब भी रीता को भूख का एहसास होता तो वह कूड़े के ढेर की तरफ बढ़ जाती और लोहा, कांच और प्लास्टिक खाकर अपनी भूख मिटाती रही।
# यहां औरतें मर्दों के जूतों से पानी पीने को मजबूर, जाने क्या है कारण

रीता की दादी छेदाना के मुताबिक मां के मरने के बाद रीता का पूरी तरह ख्याल न रख पाने का मलाल उसके मन में भी है और वो इस बात को मानती हैं कि आज जो रीता की आदत बन चुकी है उसके लिए उसकी देखभाल में कमी एक बड़ी वजह है। वहीं, पड़ोसी सुरेन्द्र ने बताया कि जहां पिता रोजी-रोटी की आस में घर से बाहर घूमता रहता था, तो रीता भूख मिटाने के लिए लोहा, ब्लेड और प्लास्टिक के कैसेट खाकर अपना गुजारा करती थी।
# जानिए कैसे आप भी ढूंढ सकते हैं अपना हमशक्‍ल..!!


Post a Comment

और नया पुराने