मंगलवार की रात देश के लिए काफी चौंकाने वाली रही क्योकि मोदी ने 500 और 1000 रुपयों के नोट पर रोक लगा दी। कहते है कि हर निति, निर्णय के पीछे किसी न किसी का दिमाग होता है जानते हैं 500 और 1000 के नोट बंद कराने के पीछे किसका दिमाग होगा ? आइये हम आपको बताते है इसके पीछे किसका दिमाग था। इसके पीछे अनिल बोकिल का दिमाग था। अनिल बोकिल पेशे से पुणे (महाराष्ट्र) के एक इंजीनियर है और यह अर्थक्रांति संस्थान के एक बहुत ही मुख्य सदस्य है।
आपको बता दे कि अनिल वर्ष 2014 में चुनाव से पहले ही नरेंद्र मोदी से मिल चुके थे और उस समय ही उन्हें मुलाकात के लिए केवल 9 मिनट का ही समय दिया गया था। लेकिन जब भ्रष्टाचार और नकली रुपयों को रोकने के लिए ये अपना प्रस्ताव सुनाने लगे तो नरेंद्र मोदी ने इनका यह प्रस्ताव 2 घंटों तक सुना था। आपको हैरान करने वाली एक बात और बता देते है इन्होने ये प्रस्ताव कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को देने के लिए भी समय माँगा था लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गाँधी ने अनिल बोकिल को केवल 15 सेकंड्स का समय दिया था और राहुल ने कहा कि आप डॉ गोपाल मोहन से मिल लीजिए।
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आइये जानते है क्या है अनिल बोकिल का अर्थक्रांति संस्थान :- अर्थक्रांति संस्थान एक चार्टर्ड एकाउंटेंट और इंजीनियर्स का एक ग्रुप है, जो इकॉनोमिक एडवायज़री बॉडी है। अर्थक्रांति ने ही प्रधानमंत्री मोदी को काला धन, महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आतंकवादियों को फंडिंग जैसी समस्याओं को रोकने के लिए यह प्रस्ताव दिया था। हाँलाकि, यह निर्णय लेना बहुत ही कठिन और चुनौतियों से भरा हुआ था, मगर प्रधानमंत्री मोदी ने सब कुछ सम्भालते हुये इस प्रस्ताव को पास कर दिया।
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