राजस्थान काफी पिछड़ा़ राज्य हैै। वहां महिलाओं की स्थिती भी दयनीय है। इसका जीता जागता भीलवाड़ा के बंकाया माता मंदिर में आज भी देखने को मिला है। वहां कोई महिला-सशक्तिकरण की बात नहीं करता। विकास की आंधी वहां अभी पत्ते तक भी नहीं हिला पायी है।
झाड़-फूंक करने वाले मंदिर के पुजारी इन औरतों के भूत उतारने के लिए क्रूरता की कोई भी हद पार करने से नहीं चूकते। औरतों को सिर पर जूते रख कर कई किलोमीटर तक चलते देखा जाना, यहां आम बात है। हर तरह की गंदगी से सने जूते, जिन्हें छूने की भी आप कल्पना नहीं करना चाहेंगे, ये औरतें उन्हें अपने मुंह में दबाकर लाती हैं और इन जूतों में भर कर पानी पीती हैं।
- सावधान : चेंजिंग रूम और होटल में LED लाइट से हों सकती है आपकी रिकॉर्डिंग..!!
यहां लायी जाने वाली ज़्यादातर औरतें या तो किसी मानसिक बीमारी से जूझ रही होती हैं या उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ करार देने के लिए ही उनके ससुराल वाले उन्हें यहां लाते हैं। कई बार उनका मकसद बस औरतों को उनकी 'सही जगह' याद दिलाना होता है।
ऐसा भी नहीं है कि अन्धविश्वास के नाम पर ऐसा सिर्फ ग्रामीण महिलाओं के साथ ही हो रहा है। कई पढ़े-लिखे लोग भी इन भूत उतारने वाले बाबाओं के झांसे में आ जाते हैं। अन्धविश्वास को लोग धर्म से जोड़ देते हैं, यही कारण है कि भारत में इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं।

एक टिप्पणी भेजें