# नाबालिग वेश्याओं का दर्द, हवस का भूखा ग्राहक है इनका जीवन..!
इस कस्बे की कुल आबादी लगभग साढ़े तीन लाख के आस-पास है लेकिन इन लोगों के अलावा यहां सिर्फ टूरिस्ट ही नजर आते हैं। यहां हर साल चालीस लाख से ज्यादा विदेशी आते है। यहां पैदा होने वाले बच्चों को अपने पिता के बारे में नहीं पता लगता कि उनका पिता है कौन। जब यहां महिलाएं प्रैग्नेंट होती है तो उनके पास बच्चे को जन्म देने के अलावा कोई चारा नहीं रहता।
सेक्स वर्कर मां की माली हालत इतनी अच्छी न होने के कारण बच्चों को जबरदस्ती इस धंधे में धकेल दिया जाता है। यहां जिन बच्चियों को इस धंधे में उतार दिया जाता है उनकी पहली बोली सोलह से बीस हजार में लगती है लेकिन समय के साथ यहां भी बदलाव आया है। ऐसी संस्थाएं आई हैं, जिन्होंने इन बच्चियों के भविष्य को सुनहरा बनाया।
# यहां लड़कियों का मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना था

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