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फिर इस पैसे को यह समिति 30-35 गांव की 300 बेटियों को पढ़ाने पर खर्चा करती है। यह रिवाज यहां करीब सात साल से चल रहा है। दरअसल, वर्ष 2005 से पहले यहां बेटियों की शिक्षा की स्थिति बेहद खराब थी। उस समय एक बेटी भी मिडिल पास नहीं थी। तब यहां के सरपंच जगदेव सहरण ने कालुआना वेलफेयर शिक्षा समिति बनाई।
उसके बाद गांव की बेटी को अपनी दुल्हन बनाने के लिए गांव में आने वाले दूल्हे से शिक्षा का दान लेना शुरू किया गया जो कि आज भी प्रचलित है। यह दान दुल्हन के पिता की ओर से मांगा जाता है। इससे समिति को लाखों रुपए की आमदनी होती है। यह दान 100 रुपए से लेकर हजारों रुपए तक होता है।
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