यहां एड्स से बचने के लिए लड़के करवाते है दर्दनाक खतना


एक तरफ दुनिया में एड्स के इलाज की खोज जारी है। वहीं, अफ्रीका के कुछ देशों में इसे दूर करने का देसी तरीका खोज निकालने का दावा किया है। युगांडा एकमात्र ऐसा देश है, जहां एड्स की रोकथाम के लिए पुरुषों के खतना को प्रथा के तौर इस्तेमाल किया जा रहा है। 

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कुछ साल पहले यूएन एड्स ने भी खतना को एचआईवी से बचने का कारगर तरीका बताया है,  लेकिन अफ्रीका में खतना सिर्फ एड्स से ही नहीं जुड़ा है। कई ट्राइब्स में इसे मैनहुड यानी मर्द बनने से जोड़कर देखा जाता है। टीनेजर लड़के का खतना होने के बाद उसके मर्द बनने की प्रक्रिया पूरी होती है और समाज में उसे गंभीरता से लिया जाता है। एक टीनेजर लड़के के खतने की प्रथा तीन दिन चलती है। इस दौरान पूरी कम्युनिटी एक साथ होती है। औरतें गाती हैं और नाचती हैं और पुरुष शराब पीते हैं। प्रथा में लड़के के चेहरे पर कीचड़ और बाजरे का लेप किया जाता है। 

मर्दों से घिरे लड़के के हाथ में लाठी होती है। जिसे पकड़ कर ऊपर की ओर उठाए रहना होता है। सर्जन उसका 'खतना' करते ही मुंह में रखी व्हिसिल बजा देता है। इसका मतलब लड़का एड्स से मुक्त है और मर्द बन चुका है। युगांडा सरकार ने 'खतना' को बढ़ावा देने के लिए 2010 में एक प्रोग्राम चलाया था। वहीं, जिम्बाब्वे में तो एचआईवी इन्फेक्शन रोकने के लिए कई सांसद, संसद के भीतर खतना करवा चुके हैं। लेकिन ये बात सिद्ध नही हुई की खतना करवाने से एड्स नही होता है। 

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